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पितृ पक्ष 2026: क्या करें और क्या न करें | AstroStarTalk

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पितृ पक्ष 2026: क्या करें और क्या न करें | AstroStarTalk

Posted on 30 September 2026 | by Astro Star Talk

पितृ पक्ष में क्या करें और क्या न करें: श्रद्धा, सादगी और सही समझ | AstroStarTalk

By AstroStarTalk | प्रकाशित: 30 सितंबर 2026 | विषय: पितृ पक्ष, श्राद्ध, ज्योतिष

AstroStarTalk की ओर से आपके लिए: पितृ पक्ष पर एक सरल, भरोसेमंद और डर-मुक्त गाइड।

हमारे घरों में कुछ दिन ऐसे होते हैं जब बिना कहे ही माहौल थोड़ा शांत हो जाता है। रसोई से आती खुशबू में दादी-नानी की याद घुल जाती है, और पुरानी तस्वीर के आगे दीया जलाते वक़्त हाथ अपने आप जुड़ जाते हैं। पितृ पक्ष ऐसे ही दिनों का नाम है। ये डरने या घबराने का समय नहीं है। ये अपने उन बड़ों को याद करने का समय है जिनकी वजह से आज हम यहाँ हैं।

अक्सर लोग पूछते हैं कि इन दिनों क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, और कहीं कोई गलती न हो जाए। AstroStarTalk के इस लेख में हम पितृ पक्ष को आसान भाषा में समझेंगे: क्या करें, क्या न करें, और अगर पूरी विधि न हो पाए तो क्या किया जाए।

पितृ पक्ष क्या है और क्यों ख़ास है

पितृ पक्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष का वह पखवाड़ा है, जो पूरी तरह हमारे पूर्वजों को समर्पित माना गया है। इसे श्राद्ध पक्ष और महालय पक्ष भी कहते हैं। मान्यता है कि इन दिनों हमारे पितर सूक्ष्म रूप में अपने परिवार के पास आते हैं और श्रद्धा से किया गया तर्पण, दान और भोजन स्वीकार करते हैं।

"श्राद्ध" शब्द ही "श्रद्धा" से बना है। यानी असली बात दिखावे की नहीं, भाव की है। आपने कितना बड़ा आयोजन किया, इससे ज़्यादा मायने ये रखता है कि आपने कितने मन से याद किया। AstroStarTalk की कोशिश हमेशा यही रहती है कि ज्योतिष और परंपरा को डर के बिना, सही समझ के साथ आप तक पहुँचाया जाए।

पितृ पक्ष 2026 की तिथियाँ

इस साल कई पंचांगों के अनुसार पितृ पक्ष 27 सितंबर, रविवार को प्रतिपदा श्राद्ध से शुरू हुआ है और 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या (महालय अमावस्या) पर समाप्त होगा। कुछ जगह 26 सितंबर के पूर्णिमा श्राद्ध से भी गिनती की जाती है, इसलिए दो शुरुआती तारीखें दिख सकती हैं। इसमें उलझने की ज़रूरत नहीं।

कुछ ख़ास तिथियाँ याद रखिए:

  • 4 अक्टूबर: मातृ नवमी, जो माताओं और सुहागन स्त्रियों के श्राद्ध के लिए मानी जाती है
  • 9 अक्टूबर: चतुर्दशी श्राद्ध, जो परंपरा में अकाल मृत्यु वाले पितरों के लिए है
  • 10 अक्टूबर: सर्वपितृ अमावस्या, जो सभी पितरों के लिए है

अगले ही दिन, 11 अक्टूबर से, शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाएगी। तिथि का सटीक समय आपके शहर के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है, इसलिए पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग या परिवार के पंडित जी से एक बार पूछ लेना अच्छा रहता है।

पितृ पक्ष में क्या करें

1. सही तिथि पर श्राद्ध करें

जिस पितर का निधन जिस तिथि को हुआ था, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है। परंपरा के अनुसार श्राद्ध दोपहर के समय (अपराह्न काल) में करना उचित माना गया है। अगर तिथि याद न हो या पता ही न हो, तो चिंता की बात नहीं। सर्वपितृ अमावस्या इसी के लिए है।

2. तर्पण करें

सुबह स्नान के बाद साफ़ वस्त्र पहनकर जल में काले तिल मिलाएँ और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का नाम लेते हुए जल अर्पित करें। अगर विधि पूरी न आती हो तो भी मन से नाम लेकर, हाथ जोड़कर जल चढ़ाना कोई छोटी बात नहीं है।

3. भोजन का अंश निकालें

श्राद्ध के भोजन में से गाय, कौवे, कुत्ते और चींटी जैसे जीवों के लिए अलग हिस्सा निकालने की परंपरा है। कौवे को पितरों का प्रतिनिधि माना जाता है। शहरों में ये सब हमेशा संभव नहीं होता, तो जो भी आसपास मिल सके, जैसे गली की गाय या पक्षी, उन्हें प्रेम से खिला दें।

4. ब्राह्मण भोजन और दान

श्राद्ध के बाद योग्य ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन कराना और यथाशक्ति दान देना शुभ माना जाता है। अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, घी या छाता जैसी चीज़ें दी जाती हैं। ध्यान रहे कि दान अपनी क्षमता के हिसाब से हो। उधार लेकर या दबाव में किया गया दान इसका मक़सद नहीं है।

5. सात्विक भोजन और सादा जीवन

इन दिनों घर में सादा और सात्विक खाना बनाइए। पितरों की पसंद का कोई व्यंजन भी बना सकते हैं। कई परिवारों में दादाजी की पसंद की खीर या नानी की पसंद की पूरी-सब्ज़ी बनती है, और यही परंपरा का सबसे प्यारा रूप है।

6. दक्षिण दिशा में दीपक

शाम को घर के दक्षिण दिशा वाले हिस्से में या पितरों की तस्वीर के पास दीपक जलाएँ। पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना भी इन दिनों शुभ माना जाता है।

7. पाठ और स्मरण

श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ, ख़ासकर सातवाँ अध्याय, या पितृ स्तोत्र का पाठ अनेक परिवारों में किया जाता है। कुछ लोग गरुड़ पुराण भी सुनते हैं। जो भी पाठ करें, शांत मन से करें।

8. बड़ों की सेवा

सबसे सुंदर श्राद्ध वो है जो जीवित बड़ों के प्रति हमारे व्यवहार में दिखे। माता-पिता और बुज़ुर्गों का हाल पूछना, उनके साथ बैठकर खाना खाना और उनकी बात सुनना भी पितरों को याद करने का ही एक रूप है।

पितृ पक्ष में क्या न करें

ये बातें परंपरा और मान्यता पर आधारित हैं, और अलग-अलग क्षेत्रों व परिवारों में इनका पालन थोड़ा अलग हो सकता है।

1. शुभ और मांगलिक कार्य टालें

विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक काम पारंपरिक रूप से इन दिनों टाले जाते हैं, क्योंकि ये समय स्मरण और गंभीरता का माना गया है। इसका कारण "अशुभ का डर" नहीं, बल्कि ये भाव है कि ये पखवाड़ा पूर्वजों के लिए है।

2. तामसिक भोजन से दूर रहें

मांस, मछली, अंडा, शराब और कई परिवारों में लहसुन-प्याज़ भी इन दिनों नहीं खाए जाते।

3. नई बड़ी ख़रीदारी से बचें

नया वाहन, गहने या घर जैसी बड़ी ख़रीदारी कई लोग इन दिनों नहीं करते और नवरात्रि तक रुक जाते हैं। रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें ख़रीदने पर कोई रोक नहीं है।

4. बाल और नाख़ून कटवाने से परहेज़

कई परंपराओं में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति के लिए इन दिनों बाल, दाढ़ी और नाख़ून कटवाना वर्जित माना गया है।

5. क्रोध, झगड़ा और अपमान से बचें

घर के बड़ों से ऊँची आवाज़ में बात करना, किसी भिखारी या ज़रूरतमंद को दुत्कारना और जानवरों को भगाना, ये सब इन दिनों ख़ासतौर पर अच्छा नहीं माना जाता। कौन जाने किस रूप में कोई अपना आ जाए, ये भाव पीढ़ियों से चला आ रहा है।

6. अन्न की बर्बादी न करें

श्राद्ध का भोजन जूठा छोड़ना या फेंकना ठीक नहीं माना जाता। जितना ज़रूरी हो, उतना ही बनाइए और बाँटिए।

अगर विधि-विधान न कर पाएँ तो?

आज की भागदौड़ में हर किसी के लिए पंडित बुलाना, गया जाना या पूरा कर्मकांड करना संभव नहीं होता। कोई विदेश में है, कोई नौकरी की वजह से शहर से दूर, और किसी की तबीयत साथ नहीं देती।

ऐसे में भी रास्ता है। पितरों का नाम लेकर एक लोटा जल चढ़ा दीजिए, किसी भूखे को खाना खिला दीजिए, गाय को रोटी दे दीजिए या किसी ज़रूरतमंद की मदद कर दीजिए। शास्त्रों में भी श्रद्धा को ही सबसे ऊपर रखा गया है। जो लोग तिथि नहीं जानते, वे सर्वपितृ अमावस्या पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध या दान कर सकते हैं।

ज्योतिष की दृष्टि से पितृ पक्ष

ज्योतिष में सूर्य को पिता और पितरों का कारक माना जाता है। परंपरा में कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान सूर्य कन्या राशि में गोचर करते हैं। कुंडली में नौवाँ भाव पितृ स्थान और भाग्य से जुड़ा माना जाता है, और जब इस पर सूर्य, राहु या शनि जैसे ग्रहों का कठिन प्रभाव दिखता है, तो कुछ ज्योतिषी इसे "पितृ दोष" की संभावना से जोड़ते हैं।

यहाँ एक बात साफ़ कहना ज़रूरी है। AstroStarTalk की सलाह यही है कि पितृ दोष के नाम पर घबराइए नहीं। कुंडली किसी अनुभवी ज्योतिषी को दिखाए बिना किसी नतीजे पर न पहुँचें और किसी महँगे उपाय या अनुष्ठान के चक्कर में न पड़ें। और अगर आपके मन में सिर्फ़ इतना है कि "मैं अपने पितरों को श्रद्धा से याद करूँ", तो वही सबसे सच्चा उपाय है।

कुछ आम सवाल

क्या पितृ पक्ष में पूजा-पाठ बंद कर देना चाहिए?
नहीं। रोज़ की पूजा जारी रखी जा सकती है। बस माहौल सादगी और स्मरण का रखिए।

क्या महिलाएँ श्राद्ध या तर्पण कर सकती हैं?
अलग-अलग परंपराओं में मान्यताएँ अलग हैं। कई परिवारों में पुत्र या पौत्र करते हैं, और कई जगह बेटियाँ भी श्रद्धा से करती हैं। अपने परिवार की परंपरा और पंडित जी की सलाह का ध्यान रखें।

क्या इन दिनों कुछ भी ख़रीदना मना है?
ज़रूरी सामान ख़रीदने में कोई रुकावट नहीं। बस सोने-चाँदी, वाहन या घर जैसी बड़ी ख़रीदारी को कई लोग नवरात्रि तक टाल देते हैं।

अंत में

पितृ पक्ष हमें याद दिलाता है कि हम अकेले नहीं आए हैं। हमारे पीछे पीढ़ियों की मेहनत, त्याग और दुआएँ हैं। इन पंद्रह दिनों में चाहे आप पूरी विधि से श्राद्ध करें या बस एक दीया जलाकर आँखें बंद कर लें, अगर मन में कृतज्ञता है, तो वही सबसे बड़ी पूजा है।

10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर अपने पितरों को विदा दीजिए, और अगली सुबह नवरात्रि के साथ माँ दुर्गा का स्वागत नई ऊर्जा से कीजिए।

आपके परिवार में पितृ पक्ष की कौन सी परंपरा सबसे ख़ास है? हमें कमेंट में ज़रूर बताइए।

AstroStarTalk की ओर से आप सभी को पितृ पक्ष और आने वाली शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ। ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए, और कुंडली या ज्योतिष से जुड़े सवाल हों तो AstroStarTalk पर हमसे ज़रूर पूछिए।

नोट: तिथि और विधि क्षेत्र व परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती हैं। अंतिम निर्णय से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित जी से सलाह लें। सर्वाधिकार सुरक्षित, AstroStarTalk।

पितृ पक्ष में क्या करें और क्या न करें: श्रद्धा, सादगी और सही समझ | AstroStarTalk

By AstroStarTalk | प्रकाशित: 30 सितंबर 2026 | विषय: पितृ पक्ष, श्राद्ध, ज्योतिष

AstroStarTalk की ओर से आपके लिए: पितृ पक्ष पर एक सरल, भरोसेमंद और डर-मुक्त गाइड।

हमारे घरों में कुछ दिन ऐसे होते हैं जब बिना कहे ही माहौल थोड़ा शांत हो जाता है। रसोई से आती खुशबू में दादी-नानी की याद घुल जाती है, और पुरानी तस्वीर के आगे दीया जलाते वक़्त हाथ अपने आप जुड़ जाते हैं। पितृ पक्ष ऐसे ही दिनों का नाम है। ये डरने या घबराने का समय नहीं है। ये अपने उन बड़ों को याद करने का समय है जिनकी वजह से आज हम यहाँ हैं।

अक्सर लोग पूछते हैं कि इन दिनों क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, और कहीं कोई गलती न हो जाए। AstroStarTalk के इस लेख में हम पितृ पक्ष को आसान भाषा में समझेंगे: क्या करें, क्या न करें, और अगर पूरी विधि न हो पाए तो क्या किया जाए।

पितृ पक्ष क्या है और क्यों ख़ास है

पितृ पक्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष का वह पखवाड़ा है, जो पूरी तरह हमारे पूर्वजों को समर्पित माना गया है। इसे श्राद्ध पक्ष और महालय पक्ष भी कहते हैं। मान्यता है कि इन दिनों हमारे पितर सूक्ष्म रूप में अपने परिवार के पास आते हैं और श्रद्धा से किया गया तर्पण, दान और भोजन स्वीकार करते हैं।

"श्राद्ध" शब्द ही "श्रद्धा" से बना है। यानी असली बात दिखावे की नहीं, भाव की है। आपने कितना बड़ा आयोजन किया, इससे ज़्यादा मायने ये रखता है कि आपने कितने मन से याद किया। AstroStarTalk की कोशिश हमेशा यही रहती है कि ज्योतिष और परंपरा को डर के बिना, सही समझ के साथ आप तक पहुँचाया जाए।

पितृ पक्ष 2026 की तिथियाँ

इस साल कई पंचांगों के अनुसार पितृ पक्ष 27 सितंबर, रविवार को प्रतिपदा श्राद्ध से शुरू हुआ है और 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या (महालय अमावस्या) पर समाप्त होगा। कुछ जगह 26 सितंबर के पूर्णिमा श्राद्ध से भी गिनती की जाती है, इसलिए दो शुरुआती तारीखें दिख सकती हैं। इसमें उलझने की ज़रूरत नहीं।

कुछ ख़ास तिथियाँ याद रखिए:

  • 4 अक्टूबर: मातृ नवमी, जो माताओं और सुहागन स्त्रियों के श्राद्ध के लिए मानी जाती है
  • 9 अक्टूबर: चतुर्दशी श्राद्ध, जो परंपरा में अकाल मृत्यु वाले पितरों के लिए है
  • 10 अक्टूबर: सर्वपितृ अमावस्या, जो सभी पितरों के लिए है

अगले ही दिन, 11 अक्टूबर से, शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाएगी। तिथि का सटीक समय आपके शहर के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है, इसलिए पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग या परिवार के पंडित जी से एक बार पूछ लेना अच्छा रहता है।

पितृ पक्ष में क्या करें

1. सही तिथि पर श्राद्ध करें

जिस पितर का निधन जिस तिथि को हुआ था, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है। परंपरा के अनुसार श्राद्ध दोपहर के समय (अपराह्न काल) में करना उचित माना गया है। अगर तिथि याद न हो या पता ही न हो, तो चिंता की बात नहीं। सर्वपितृ अमावस्या इसी के लिए है।

2. तर्पण करें

सुबह स्नान के बाद साफ़ वस्त्र पहनकर जल में काले तिल मिलाएँ और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का नाम लेते हुए जल अर्पित करें। अगर विधि पूरी न आती हो तो भी मन से नाम लेकर, हाथ जोड़कर जल चढ़ाना कोई छोटी बात नहीं है।

3. भोजन का अंश निकालें

श्राद्ध के भोजन में से गाय, कौवे, कुत्ते और चींटी जैसे जीवों के लिए अलग हिस्सा निकालने की परंपरा है। कौवे को पितरों का प्रतिनिधि माना जाता है। शहरों में ये सब हमेशा संभव नहीं होता, तो जो भी आसपास मिल सके, जैसे गली की गाय या पक्षी, उन्हें प्रेम से खिला दें।

4. ब्राह्मण भोजन और दान

श्राद्ध के बाद योग्य ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन कराना और यथाशक्ति दान देना शुभ माना जाता है। अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, घी या छाता जैसी चीज़ें दी जाती हैं। ध्यान रहे कि दान अपनी क्षमता के हिसाब से हो। उधार लेकर या दबाव में किया गया दान इसका मक़सद नहीं है।

5. सात्विक भोजन और सादा जीवन

इन दिनों घर में सादा और सात्विक खाना बनाइए। पितरों की पसंद का कोई व्यंजन भी बना सकते हैं। कई परिवारों में दादाजी की पसंद की खीर या नानी की पसंद की पूरी-सब्ज़ी बनती है, और यही परंपरा का सबसे प्यारा रूप है।

6. दक्षिण दिशा में दीपक

शाम को घर के दक्षिण दिशा वाले हिस्से में या पितरों की तस्वीर के पास दीपक जलाएँ। पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना भी इन दिनों शुभ माना जाता है।

7. पाठ और स्मरण

श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ, ख़ासकर सातवाँ अध्याय, या पितृ स्तोत्र का पाठ अनेक परिवारों में किया जाता है। कुछ लोग गरुड़ पुराण भी सुनते हैं। जो भी पाठ करें, शांत मन से करें।

8. बड़ों की सेवा

सबसे सुंदर श्राद्ध वो है जो जीवित बड़ों के प्रति हमारे व्यवहार में दिखे। माता-पिता और बुज़ुर्गों का हाल पूछना, उनके साथ बैठकर खाना खाना और उनकी बात सुनना भी पितरों को याद करने का ही एक रूप है।

पितृ पक्ष में क्या न करें

ये बातें परंपरा और मान्यता पर आधारित हैं, और अलग-अलग क्षेत्रों व परिवारों में इनका पालन थोड़ा अलग हो सकता है।

1. शुभ और मांगलिक कार्य टालें

विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक काम पारंपरिक रूप से इन दिनों टाले जाते हैं, क्योंकि ये समय स्मरण और गंभीरता का माना गया है। इसका कारण "अशुभ का डर" नहीं, बल्कि ये भाव है कि ये पखवाड़ा पूर्वजों के लिए है।

2. तामसिक भोजन से दूर रहें

मांस, मछली, अंडा, शराब और कई परिवारों में लहसुन-प्याज़ भी इन दिनों नहीं खाए जाते।

3. नई बड़ी ख़रीदारी से बचें

नया वाहन, गहने या घर जैसी बड़ी ख़रीदारी कई लोग इन दिनों नहीं करते और नवरात्रि तक रुक जाते हैं। रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें ख़रीदने पर कोई रोक नहीं है।

4. बाल और नाख़ून कटवाने से परहेज़

कई परंपराओं में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति के लिए इन दिनों बाल, दाढ़ी और नाख़ून कटवाना वर्जित माना गया है।

5. क्रोध, झगड़ा और अपमान से बचें

घर के बड़ों से ऊँची आवाज़ में बात करना, किसी भिखारी या ज़रूरतमंद को दुत्कारना और जानवरों को भगाना, ये सब इन दिनों ख़ासतौर पर अच्छा नहीं माना जाता। कौन जाने किस रूप में कोई अपना आ जाए, ये भाव पीढ़ियों से चला आ रहा है।

6. अन्न की बर्बादी न करें

श्राद्ध का भोजन जूठा छोड़ना या फेंकना ठीक नहीं माना जाता। जितना ज़रूरी हो, उतना ही बनाइए और बाँटिए।

अगर विधि-विधान न कर पाएँ तो?

आज की भागदौड़ में हर किसी के लिए पंडित बुलाना, गया जाना या पूरा कर्मकांड करना संभव नहीं होता। कोई विदेश में है, कोई नौकरी की वजह से शहर से दूर, और किसी की तबीयत साथ नहीं देती।

ऐसे में भी रास्ता है। पितरों का नाम लेकर एक लोटा जल चढ़ा दीजिए, किसी भूखे को खाना खिला दीजिए, गाय को रोटी दे दीजिए या किसी ज़रूरतमंद की मदद कर दीजिए। शास्त्रों में भी श्रद्धा को ही सबसे ऊपर रखा गया है। जो लोग तिथि नहीं जानते, वे सर्वपितृ अमावस्या पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध या दान कर सकते हैं।

ज्योतिष की दृष्टि से पितृ पक्ष

ज्योतिष में सूर्य को पिता और पितरों का कारक माना जाता है। परंपरा में कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान सूर्य कन्या राशि में गोचर करते हैं। कुंडली में नौवाँ भाव पितृ स्थान और भाग्य से जुड़ा माना जाता है, और जब इस पर सूर्य, राहु या शनि जैसे ग्रहों का कठिन प्रभाव दिखता है, तो कुछ ज्योतिषी इसे "पितृ दोष" की संभावना से जोड़ते हैं।

यहाँ एक बात साफ़ कहना ज़रूरी है। AstroStarTalk की सलाह यही है कि पितृ दोष के नाम पर घबराइए नहीं। कुंडली किसी अनुभवी ज्योतिषी को दिखाए बिना किसी नतीजे पर न पहुँचें और किसी महँगे उपाय या अनुष्ठान के चक्कर में न पड़ें। और अगर आपके मन में सिर्फ़ इतना है कि "मैं अपने पितरों को श्रद्धा से याद करूँ", तो वही सबसे सच्चा उपाय है।

कुछ आम सवाल

क्या पितृ पक्ष में पूजा-पाठ बंद कर देना चाहिए?
नहीं। रोज़ की पूजा जारी रखी जा सकती है। बस माहौल सादगी और स्मरण का रखिए।

क्या महिलाएँ श्राद्ध या तर्पण कर सकती हैं?
अलग-अलग परंपराओं में मान्यताएँ अलग हैं। कई परिवारों में पुत्र या पौत्र करते हैं, और कई जगह बेटियाँ भी श्रद्धा से करती हैं। अपने परिवार की परंपरा और पंडित जी की सलाह का ध्यान रखें।

क्या इन दिनों कुछ भी ख़रीदना मना है?
ज़रूरी सामान ख़रीदने में कोई रुकावट नहीं। बस सोने-चाँदी, वाहन या घर जैसी बड़ी ख़रीदारी को कई लोग नवरात्रि तक टाल देते हैं।

अंत में

पितृ पक्ष हमें याद दिलाता है कि हम अकेले नहीं आए हैं। हमारे पीछे पीढ़ियों की मेहनत, त्याग और दुआएँ हैं। इन पंद्रह दिनों में चाहे आप पूरी विधि से श्राद्ध करें या बस एक दीया जलाकर आँखें बंद कर लें, अगर मन में कृतज्ञता है, तो वही सबसे बड़ी पूजा है।

10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर अपने पितरों को विदा दीजिए, और अगली सुबह नवरात्रि के साथ माँ दुर्गा का स्वागत नई ऊर्जा से कीजिए।

आपके परिवार में पितृ पक्ष की कौन सी परंपरा सबसे ख़ास है? हमें कमेंट में ज़रूर बताइए।

AstroStarTalk की ओर से आप सभी को पितृ पक्ष और आने वाली शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ। ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए, और कुंडली या ज्योतिष से जुड़े सवाल हों तो AstroStarTalk पर हमसे ज़रूर पूछिए।

नोट: तिथि और विधि क्षेत्र व परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती हैं। अंतिम निर्णय से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित जी से सलाह लें। सर्वाधिकार सुरक्षित, AstroStarTalk।