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मातृ नवमी 2026 🌼: श्राद्ध विधि, मुहूर्त और नियम | AstroStarTalk

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मातृ नवमी 2026 🌼: श्राद्ध विधि, मुहूर्त और नियम | AstroStarTalk

Posted on 03 October 2026 | by Astro Star Talk

मातृ नवमी 2026 🌼: किसका श्राद्ध, कैसे करें, विधि और नियम | AstroStarTalk

By AstroStarTalk | प्रकाशित: 3 अक्टूबर 2026 | विषय: पितृ पक्ष, मातृ नवमी, श्राद्ध

AstroStarTalk की ओर से: माँ, दादी और घर की दिवंगत स्त्रियों को याद करने के लिए एक सरल गाइड। 🪔


माँ का नाम आते ही मन अपने आप नरम हो जाता है। उनके हाथ का खाना, उनकी डाँट, उनकी चुप्पी में छुपी चिंता, सब कुछ आँखों के सामने आ जाता है। पितृ पक्ष के पंद्रह दिनों में एक दिन ऐसा आता है जो ख़ास तौर पर घर की इन्हीं स्त्रियों को समर्पित है। उस दिन को मातृ नवमी कहते हैं।

इस साल मातृ नवमी कल, 4 अक्टूबर 2026, रविवार को है। AstroStarTalk के इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि मातृ नवमी क्या है, किसका श्राद्ध इस दिन होता है, विधि क्या है, और अगर किसी वजह से न कर पाएँ तो क्या करें। 🙏

🌼 मातृ नवमी क्या है

पितृ पक्ष में हर तिथि का श्राद्ध उसी तिथि पर किया जाता है जिस तिथि पर परिवार के दिवंगत सदस्य का निधन हुआ हो। नवमी तिथि का श्राद्ध नवमी श्राद्ध कहलाता है, और परंपरा में इसे मातृ नवमी कहा जाता है, क्योंकि ये दिन माँ और घर की दिवंगत महिलाओं के श्राद्ध के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

कई जगह इसे अविधवा नवमी भी कहते हैं, यानी वे स्त्रियाँ जिनका निधन पति के जीवित रहते हुए सुहागन अवस्था में हुआ। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया तर्पण और भोजन-दान मातृ पक्ष के पितरों को तृप्ति देता है और परिवार में सुख-शांति लाता है। 🌺

📅 मातृ नवमी 2026 की तारीख़ और समय

  • तारीख़: रविवार, 4 अक्टूबर 2026
  • नवमी तिथि: 4 अक्टूबर की सुबह लगभग 5:53 बजे से शुरू और 5 अक्टूबर की सुबह लगभग 3:55 बजे तक
  • कुतुप मुहूर्त: लगभग 11:46 AM से 12:33 PM (दिल्ली के अनुसार)
  • रौहिण मुहूर्त: लगभग 12:33 PM से 1:20 PM
  • अपराह्न काल: लगभग 1:20 PM से 3:42 PM तक

⚠️ ध्यान रखें: ये समय दिल्ली के हिसाब से हैं, और अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनटों का अंतर मिलता है। आपके शहर में ये समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी से एक बार पुष्टि कर लें।

तिथि पूरा दिन चलने की वजह से इस साल तारीख़ को लेकर कोई उलझन नहीं है। श्राद्ध दोपहर के समय, यानी कुतुप, रौहिण या अपराह्न काल में करना शुभ माना जाता है।

👩 मातृ नवमी पर किनका श्राद्ध होता है

  • माँ, दादी, परदादी
  • सास और घर की दूसरी दिवंगत महिलाएँ
  • वे स्त्रियाँ जिनका निधन सुहागन अवस्था में हुआ
  • वे सभी परिजन (स्त्री या पुरुष) जिनका निधन किसी भी पक्ष की नवमी तिथि को हुआ हो

मतलब अगर आपके किसी अपने का निधन नवमी तिथि को हुआ था, तो उनका श्राद्ध भी इसी दिन किया जाता है।

🪔 मातृ नवमी की सरल श्राद्ध विधि

नीचे की विधि एक सामान्य रूप है। हर परिवार और क्षेत्र की परंपरा अलग हो सकती है, इसलिए अपने कुल की रीति के अनुसार ही चलें।

1. सुबह की तैयारी 🚿
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ़ वस्त्र पहनें। घर और रसोई साफ़ रखें।

2. सात्विक भोजन बनाएँ 🍚
श्राद्ध का भोजन सादा और सात्विक होना चाहिए। माँ या दादी को जो व्यंजन पसंद थे, जैसे खीर, पूरी, कचौड़ी या दाल, वही बनाना सबसे प्यारा तरीका माना जाता है। प्याज़-लहसुन और तामसिक चीज़ें न डालें।

3. तर्पण 💧
कुतुप या रौहिण मुहूर्त में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। एक पात्र में जल लें, उसमें काले तिल और कुशा रखें, और दिवंगत माँ या दादी का नाम (और गोत्र, अगर जानते हों) लेते हुए जल अर्पित करें।

4. पिंड और भोग अर्पण 🌾
परंपरा में चावल, जौ या आटे के पिंड बनाकर अर्पित किए जाते हैं। अगर विधि जटिल लगे, तो पंडित जी की सलाह लें या सरल रूप में भोजन का भोग लगाएँ।

5. पंचबलि का भाग निकालें 🐄
भोजन में से गाय, कुत्ते, कौवे, देवताओं और चींटियों के लिए अलग हिस्सा निकालने की परंपरा है। शहर में हर किसी के लिए ये मुमकिन नहीं होता, तो जो भी पास मिले, जैसे गली की गाय या पक्षी, उन्हें श्रद्धा से खिला दें।

6. ब्राह्मण भोजन और दान 🙏
योग्य ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन कराएँ। मातृ नवमी पर परंपरा में महिलाओं को वस्त्र, श्रृंगार का सामान या भोजन देना शुभ माना जाता है। दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही करें, उधार लेकर या दबाव में नहीं।

7. अंत में प्रणाम और क्षमा-प्रार्थना 🕊️
श्राद्ध के बाद शांत मन से पितरों को प्रणाम करें और अगर कोई कमी रह गई हो तो मन से क्षमा माँगें। यही भाव श्राद्ध का सबसे बड़ा हिस्सा है।

✅ मातृ नवमी पर क्या करें

  • सुबह दीपक जलाएँ और माँ या दादी की तस्वीर पर फूल चढ़ाएँ
  • उनकी पसंद का भोजन बनाकर अर्पित करें
  • गाय, पक्षी और ज़रूरतमंद को भोजन दें
  • घर की बुज़ुर्ग महिलाओं का सम्मान करें, उनके साथ बैठें, बात करें
  • श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ या पितृ स्तोत्र का पाठ करें
  • मन में कृतज्ञता रखें, यही सबसे बड़ी पूजा है

❌ मातृ नवमी पर क्या न करें

  • तामसिक भोजन, शराब और नशे से दूर रहें
  • क्रोध, कड़वे बोल और झगड़े से बचें
  • भोजन की बर्बादी न करें
  • श्राद्ध को दिखावे का आयोजन न बनाएँ
  • घर की महिलाओं का अपमान या अनादर न करें

ये बातें परंपरा और मान्यता पर आधारित हैं और अलग-अलग परिवारों में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।

🤲 अगर आज या कल मातृ नवमी का श्राद्ध न हो पाए तो

जीवन में कई बार हालात ऐसे होते हैं कि कोई विदेश में है, कोई बीमार है, या छुट्टी नहीं मिलती। ऐसे में परेशान न हों।

  1. सर्वपितृ अमावस्या (10 अक्टूबर, शनिवार) को आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध कर सकते हैं। ये दिन सभी पितरों के लिए माना जाता है, और जिनका श्राद्ध छूट गया हो, उनके लिए भी।
  2. अगर पूरी विधि संभव नहीं, तो माँ या दादी का नाम लेकर एक लोटा जल चढ़ा दें, एक दीया जला दें, और किसी ज़रूरतमंद को भोजन करा दें।
  3. मन से याद करना भी श्राद्ध की भावना का हिस्सा माना गया है।

अगर आपने हमारा पिछला लेख अभी तक नहीं पढ़ा है, तो पितृ पक्ष में क्या करें और क्या न करें यहाँ पढ़ें, जिसमें पूरे पितृ पक्ष की सरल जानकारी दी गई है। 📖

🌙 पितृ पक्ष के आगे के दिन

मातृ नवमी के बाद पितृ पक्ष की कुछ और ख़ास तिथियाँ आती हैं:

  • 7 अक्टूबर: द्वादशी श्राद्ध (परंपरा में संन्यासी पितरों के लिए)
  • 8 अक्टूबर: त्रयोदशी श्राद्ध (बच्चों के श्राद्ध के लिए)
  • 9 अक्टूबर: चतुर्दशी श्राद्ध (अकाल मृत्यु वाले पितरों के लिए)
  • 10 अक्टूबर: सर्वपितृ अमावस्या

और 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाएगी। 🔱 नवरात्रि की तैयारी के लिए हमारी पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट भी AstroStarTalk पर पढ़ सकते हैं।

✨ ज्योतिष की दृष्टि से मातृ पक्ष

ज्योतिष में चंद्रमा को माँ का कारक माना जाता है, और कुंडली का चौथा भाव माँ और घर-परिवार के सुख से जुड़ा होता है। कुछ ज्योतिषी मातृ पक्ष से जुड़े श्राद्ध और तर्पण को चंद्रमा की शांति और मन की स्थिरता से भी जोड़कर देखते हैं।

पर AstroStarTalk की सलाह यही है कि इन बातों को डर की तरह न लें। "मातृ दोष" जैसे शब्द सुनकर घबराइए नहीं, और किसी महँगे अनुष्ठान के चक्कर में न पड़ें। अपनी कुंडली किसी अनुभवी ज्योतिषी को दिखाइए और उसी के अनुसार सरल उपाय अपनाइए। श्रद्धा और याद, यही सबसे बड़ा उपाय है। 🌿

❓ कुछ आम सवाल

मातृ नवमी 2026 कब है?
रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को।

क्या पिता का श्राद्ध भी मातृ नवमी पर हो सकता है?
श्राद्ध उसी तिथि पर होता है जिस तिथि पर निधन हुआ हो। अगर पिता का निधन नवमी तिथि को हुआ था, तो उनका श्राद्ध भी इसी दिन होगा। अन्यथा उनकी मृत्यु तिथि के हिसाब से अलग दिन होगा।

क्या महिलाएँ श्राद्ध या तर्पण कर सकती हैं?
अलग-अलग परंपराओं में मान्यताएँ भिन्न हैं। कई परिवारों में बेटे या पोते करते हैं, और कई जगह बेटियाँ भी श्रद्धा से करती हैं। अपने परिवार की रीति और पंडित जी की सलाह का ध्यान रखें।

अगर माँ की मृत्यु की तिथि पता न हो तो?
ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या (10 अक्टूबर) पर श्राद्ध करना उचित माना जाता है।

🌺 अंत में

माँ चली जाती हैं, पर उनकी सीख, उनका स्नेह और उनकी दुआएँ हमारे साथ चलती रहती हैं। मातृ नवमी का दिन हमें याद दिलाता है कि जिन हाथों ने हमें खाना खिलाया, उन्हें एक बार प्रेम से याद करना भी हमारा कर्तव्य है। चाहे आप पूरी विधि से श्राद्ध करें या बस एक दीया जलाकर आँखें बंद कर लें, भाव सच्चा हो तो वही पूरा है। 🙏

AstroStarTalk की ओर से आप सभी को मातृ नवमी और आने वाली शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ। ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए, और ज्योतिष से जुड़े सवाल हों तो AstroStarTalk पर हमसे ज़रूर पूछिए। 💫

आपकी माँ या दादी की कौन सी बात या कौन सा व्यंजन आपको सबसे ज़्यादा याद आता है? कमेंट में हमारे साथ ज़रूर बाँटिए। 🌼

नोट: तिथि, मुहूर्त और विधि क्षेत्र व परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती हैं। अंतिम निर्णय से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित जी से सलाह लें। सर्वाधिकार सुरक्षित, AstroStarTalk