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घटस्थापना 2026 🏺: कलश स्थापना विधि और शुभ मुहूर्त | AstroStarTalk
घटस्थापना 2026 🏺: कलश स्थापना विधि और शुभ मुहूर्त | AstroStarTalk
Posted on 05 October 2026 | by Astro Star Talk
घटस्थापना 2026 🏺: कलश स्थापना की विधि और शुभ मुहूर्त | AstroStarTalk
By AstroStarTalk | प्रकाशित: 5 अक्टूबर 2026 | विषय: नवरात्रि, घटस्थापना, पूजा विधि
AstroStarTalk की ओर से: शारदीय नवरात्रि की पहली पूजा, यानी कलश स्थापना की सरल और पूरी गाइड। 🌺
नवरात्रि की शुरुआत किसी घंटी या शंख से नहीं, एक छोटे से कलश से होती है। मिट्टी में बोए गए जौ, कलश पर लगे आम के पत्ते, लाल चुनरी में लिपटा नारियल और पास जलता दीपक, यही वो दृश्य है जो घर में माँ के आने का एहसास कराता है। इसी पूजा को घटस्थापना या कलश स्थापना कहते हैं।
हर साल लोग पूछते हैं कि घटस्थापना कब करें, किस समय करें, किस दिशा में रखें और विधि क्या है। AstroStarTalk के इस लेख में हम इन सभी सवालों के जवाब आसान भाषा में देंगे, ताकि 11 अक्टूबर की सुबह आप बिना घबराहट के पूजा कर सकें। 🙏
📅 घटस्थापना 2026 की तारीख़
इस साल शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू हो रही है, और इसी दिन घटस्थापना होगी। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात लगभग 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात लगभग 9:30 बजे तक रहती है (दिल्ली के अनुसार)। यानी तिथि पूरे दिन मौजूद रहती है, इसलिए घटस्थापना 11 अक्टूबर को ही की जाएगी।
पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा भी होती है। अगर आपने पितृ पक्ष का हमारा लेख पितृ पक्ष में क्या करें और क्या न करें नहीं पढ़ा है, तो वो भी देख लीजिए। सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को है, और अगली सुबह से ही नवरात्रि और घटस्थापना शुरू हो जाती है। 🪔
⏰ घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
दिल्ली के संदर्भ में कई पंचांगों में ये समय मिलता है:
- सुबह का मुख्य मुहूर्त: लगभग 6:19 AM से 10:12 AM
- अभिजित मुहूर्त (विकल्प): लगभग 11:44 AM से 12:31 PM
एक बात ध्यान से समझ लीजिए। कुछ पंचांगों के अनुसार 11 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग पूरे दिन रहते हैं, और परंपरा में इन दोनों के दौरान कलश स्थापना टालने की सलाह दी जाती है। इसी वजह से कुछ विद्वान अभिजित मुहूर्त को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए अलग-अलग जगह अलग समय दिख सकता है, और इसमें घबराने की बात नहीं है।
⚠️ ज़रूरी: मुहूर्त का समय हर शहर के सूर्योदय के हिसाब से कुछ मिनट आगे-पीछे होता है। अपने शहर के पंचांग या अपने कुल के पंडित जी से एक बार पक्का कर लें कि आपके यहाँ कौन सा समय सही है। अगर किसी वजह से सुबह का मुहूर्त छूट जाए, तो अभिजित मुहूर्त का विकल्प मौजूद है।
🛒 घटस्थापना के लिए सामग्री
पूजा से एक दिन पहले ये सब एक जगह रख लीजिए:
- मिट्टी, तांबे या पीतल का कलश
- चौड़ा मिट्टी का पात्र (जौ बोने के लिए)
- साफ़ मिट्टी और जौ के दाने
- गंगाजल या साफ़ जल
- आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते
- जटा वाला साबुत नारियल
- लाल चुनरी या लाल कपड़ा
- कलावा (मौली)
- सुपारी, सिक्का, अक्षत और दूर्वा
- रोली, हल्दी और चंदन
- चौकी और लाल या पीला आसन
- फूल, माला, धूप, दीपक, घी और बाती
- फल और मिठाई का भोग
सामग्री की पूरी चेकलिस्ट हमारे पिछले लेख "नवरात्रि 2026 पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट" में दी है, उसे भी देख सकते हैं। 📝
🧭 कलश कहाँ रखें
परंपरा में घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को पूजा के लिए शुभ माना जाता है। अगर वहाँ जगह न हो, तो घर का कोई साफ़, शांत और खुला कोना चुन लें। पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो तो अच्छा माना जाता है।
स्थान ऐसा हो जहाँ नौ दिन तक कलश को हिलाना न पड़े, और जहाँ बच्चों या पालतू जानवरों का धक्का न लगे।
🪔 घटस्थापना की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
ये एक सामान्य विधि है। हर परिवार और क्षेत्र की परंपरा थोड़ी अलग हो सकती है, इसलिए अपने कुल की रीति का ध्यान रखें।
स्टेप 1: स्नान और शुद्धि 🚿
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ़ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ़ करें और उस पर गंगाजल का छिड़काव करें।
स्टेप 2: चौकी और आसन 🟥
पूजा स्थान पर चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ। कलश को कभी सीधे ज़मीन पर न रखें।
स्टेप 3: जौ बोना 🌱
मिट्टी के चौड़े पात्र में साफ़ मिट्टी की एक परत बिछाएँ, उस पर जौ के दाने डालें, फिर थोड़ी और मिट्टी डालकर हल्का जल छिड़कें। इसी पात्र के बीच में कलश रखा जाता है। नौ दिनों में इन्हीं जौ के अंकुर निकलते हैं।
स्टेप 4: कलश तैयार करना 🏺
कलश के गले में कलावा बाँधें और उस पर रोली से स्वस्तिक बनाएँ। कलश में स्वच्छ जल भरें और उसमें गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत और दूर्वा डालें।
स्टेप 5: आम के पत्ते और नारियल 🥥
कलश के मुँह पर आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते इस तरह रखें कि उनके सिरे बाहर की ओर रहें। उन पर लाल चुनरी में लिपटा नारियल रखें।
स्टेप 6: कलश की स्थापना 🙏
कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। इसके बाद संकल्प लें और सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें।
स्टेप 7: देवी का आवाहन 🌺
कलश में माँ दुर्गा का आवाहन करें और माँ शैलपुत्री की पूजा करें। रोली, चंदन, अक्षत, फूल और माला चढ़ाएँ, धूप-दीप जलाएँ और भोग लगाएँ।
स्टेप 8: अखंड ज्योति 🔥
अगर आप अखंड ज्योति जलाते हैं, तो उसे कलश के पास रखें और नौ दिन उसे जलता रखने का ध्यान रखें। ये अनिवार्य नहीं है, परिवार की परंपरा के अनुसार करें।
स्टेप 9: आरती और प्रसाद 🔔
अंत में माँ की आरती करें और प्रसाद सबमें बाँटें।
✅ घटस्थापना में क्या करें
- साफ़-सुथरे और ताज़े सामान का इस्तेमाल करें
- पूजा शांत और एकाग्र मन से करें
- रोज़ सुबह-शाम कलश के पास दीया जलाएँ
- जौ में हल्का जल रोज़ डालते रहें, ज़्यादा पानी न डालें
- कलश के पास सफ़ाई और शांति बनाए रखें
❌ घटस्थापना में क्या न करें
- टूटा या दरार वाला कलश इस्तेमाल न करें
- कई परंपराओं में लोहे या स्टील का कलश न लेने की सलाह दी जाती है
- कलश को बार-बार हिलाएँ या खिसकाएँ नहीं
- घर को अकेला छोड़कर अखंड ज्योति न जलाएँ
- पूजा स्थान के पास क्रोध, कलह या अपशब्द से बचें
🌱 जौ के अंकुर को लेकर मान्यता
नौ दिनों में जौ के जो अंकुर निकलते हैं, उन्हें परंपरा में बहुत महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि हरे, घने और तेज़ी से बढ़ने वाले अंकुर शुभ संकेत माने जाते हैं। कई लोग इसे घर में सुख-समृद्धि का प्रतीक भी मानते हैं।
अगर किसी वजह से अंकुर कमज़ोर या पीले निकलें, तो घबराइए नहीं। वजह मौसम, मिट्टी या पानी भी हो सकती है, और ये सिर्फ़ मान्यता है, कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं। AstroStarTalk की सलाह यही है कि इन संकेतों को डर की तरह न लें। श्रद्धा और नियम से की गई पूजा सबसे ज़्यादा मायने रखती है। 🌿
नवरात्रि के बाद जौ को नदी या तालाब में प्रवाहित कर सकते हैं, या किसी पेड़ या गमले की मिट्टी में मिला सकते हैं। कुछ लोग थोड़े से जौ प्रसाद के रूप में घर में रखते हैं।
⚠️ अखंड ज्योति की सुरक्षा
- दीये को पर्दे, कागज़ और ज्वलनशील चीज़ों से दूर रखें
- बच्चों और पालतू जानवरों की पहुँच से दूर रखें
- घर में कम से कम एक व्यक्ति हमेशा मौजूद रहे
- दीये के नीचे थाली या अक्षत रखें
- पास में पानी का पात्र रखें
❓ कुछ आम सवाल
घटस्थापना कब है?
रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को।
अगर सुबह का मुहूर्त छूट जाए तो?
अभिजित मुहूर्त (लगभग 11:44 AM से 12:31 PM, दिल्ली के अनुसार) विकल्प के रूप में बताया जाता है। फिर भी अपने पंडित जी से सलाह ज़रूर लें।
क्या घटस्थापना बिना पंडित जी के हो सकती है?
हाँ, कई घरों में परिवार के सदस्य खुद श्रद्धा से घटस्थापना करते हैं। अगर विधि को लेकर संदेह हो, तो पंडित जी या अनुभवी बड़ों से पूछ लें।
क्या कलश में जल रोज़ बदलना होता है?
परंपरा में कलश का जल नौ दिन रखा जाता है, इसलिए उसे आमतौर पर न हिलाया जाता है और न बदला जाता है। जौ में हल्का पानी रोज़ दिया जाता है।
नवरात्रि इस साल 9 दिन की है या 10 की?
कुछ पंचांगों में तिथि के घटने-बढ़ने की वजह से इस साल नवरात्रि 10 दिन की भी बताई गई है, और अष्टमी-नवमी की तारीख़ भी अलग मिलती है। कन्या पूजन और हवन का दिन तय करने से पहले अपने शहर का पंचांग देख लें।
🌺 अंत में
घटस्थापना सिर्फ़ एक विधि नहीं, एक संकल्प है। जैसे हम मिट्टी में जौ बोते हैं और उसे नौ दिन तक जल देते हैं, वैसे ही अपने भीतर के अच्छे गुणों को भी रोज़ पोषण देते हैं। चाहे आपके पास पूरा सामान हो या बस एक साधारण कलश और दीपक, सच्चे भाव से की गई पूजा ही सबसे पूरी मानी जाती है।
AstroStarTalk की ओर से आप सभी को शारदीय नवरात्रि की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ दुर्गा आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि लाएँ। ऐसी ही जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए, और ज्योतिष से जुड़े सवाल हों तो AstroStarTalk पर हमसे ज़रूर पूछिए। 💫
आपके घर में घटस्थापना की कौन सी परंपरा सबसे ख़ास है? कमेंट में हमें ज़रूर बताइए। 🙏
नोट: मुहूर्त, तिथि और विधि क्षेत्र व परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती हैं। अंतिम निर्णय से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित जी से सलाह लें। सर्वाधिकार सुरक्षित, AstroStarTalk।