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गणेश चतुर्थी 2026: विघ्नहर्ता गणपति की पूजा विधि, महत्व और मंत्र
गणेश चतुर्थी 2026: विघ्नहर्ता गणपति की पूजा विधि, महत्व और मंत्र
Posted on 12 September 2026 | by Astro Star Talk
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥ गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और उल्लासपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धि और समृद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है। इस दिन घर-घर में गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है और भक्तिभाव से उनकी आराधना की जाती है।
गणेश चतुर्थी का महत्व: किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। मान्यता है कि गणपति बप्पा अपने भक्तों के जीवन से सभी बाधाओं और विघ्नों को दूर करते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। यह पर्व 10 दिनों तक मनाया जाता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ समाप्त होता है।
पूजा विधि: शुभ मुहूर्त में गणपति की मूर्ति की स्थापना करें, भगवान गणेश का आवाहन करते हुए मंत्रों का उच्चारण करें, स्नान-वस्त्र-चंदन-फूल-दूर्वा-मोदक अर्पित करें, "जय गणेश जय गणेश" आरती के साथ पूजा संपन्न करें, और अंत में मोदक-लड्डू का भोग लगाकर प्रसाद बांटें।
गणपति को प्रसन्न करने के उपाय: प्रतिदिन "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें, गणपति को दूर्वा घास और लाल फूल अर्पित करें, बुधवार के दिन विशेष पूजा करें, और मूर्ति को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके न रखें।
गणेश चतुर्थी एकता, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर भगवान गणेश से प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन के सभी विघ्नों को हर लें और आपको बुद्धि, समृद्धि व सुख प्रदान करें। गणपति बप्पा मोरया! मंगलमूर्ति मोरया!
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